Tuesday, February 27, 2018

कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में अंतर क्या है

अक्सर लोग हृदय संबंधी समस्या होने पर हार्ट अटैक और कार्डिक अरेस्ट (Cardiac arrest; अचानक हृदय गति रुकना) शब्द का इस्तेमाल एक ही रूप में करते हैं, लेकिन ये समानार्थक शब्द नहीं है। इन दोनों बीमारियों के कारण भिन्न होते हैं। दिल का दौरा (हार्ट अटैक) तब होता है जब हृदय में पहुंचने वाला रक्त का प्रवाह बंद हो जाता है। वहीं दूसरी ओर कार्डियक अरेस्ट तब होता है, जब हृदय विद्युतीय प्रक्रिया में अचानक समस्या आ जाती है और हृदय अचानक धड़कना बंद कर देता है। सरल शब्दों में समझा जाएं तो हार्ट अटैक का सीधा संबंध रक्त प्रवाह से है, जबकि कार्डियक अरेस्ट का संबंध हृदय को गति देने वाली विद्युतीय तरंगों में आई समस्या से होता है। कार्डियक अरेस्ट को हृदय गति रुकना भी कहा जाता है।

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हार्ट अटैक (हृदयघात) क्या होता है?

हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियां जब अवरुद्ध होकर हृदय के एक भाग तक ऑक्सीजन युक्त रक्त को जाने से रोक देती है, तो इस स्थिति को हार्ट अटैक कहा जाता है। यदि इस अवरुद्ध धमनी को जल्दी से नहीं खोला जाता है, तो इस धमनी की वजह से हृदय पर प्रभाव पड़ना शुरू हो जाता है। लंबे समय तक इस समस्या का उपचार न करने से हृदय की क्षति में बढ़ोतरी हो जाती है। हार्ट अटैक के लक्षण तत्काल और तीव्र हो सकते हैं। कई बार इस समस्या के लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं और लंबे समय तक उपचार न होने पर यह हार्ट अटैक का कारण बन जाते हैं। आपको बता दें कि अचानक होने वाले कार्डियक अरेस्ट के विपरीत हार्ट अटैक में दिल की धड़कने बंद नहीं होती हैं।

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कार्डियक अरेस्ट क्या होता है?

कार्डियक अरेस्ट बिना किसी पूर्व लक्षण के अचानक हो जाता है। यह समस्या हृदय को गति देने वाली विद्युतीय तरंगों में आई खराबी के कारण उत्पन्न होती है। इसके कारण हृदय की दर अनियमित हो जाती है। हृदय की धड़कनों व पम्पिंग क्रिया में बाधा आने के कारण हृदय मस्तिष्क, फेफड़ों और अन्य अंगों को रक्त नहीं पहुंचा पाता है। इसके बाद व्यक्ति को बेहोशी आने लगती है और कुछ समय के बाद नसों में रक्त बहना बंद हो जाता है। इस समस्या में व्यक्ति का तुरंत इलाज न हो पाने की स्थिति में उसकी मृत्यु भी हो सकती है।

यह दोनों समस्याएं कैसे एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं?

यह दोनों ही समस्याएं हृदय से संबंध रखती हैं और यह दोनों हृदय रोग है। अचानक होने लाने वाला कार्डियक अरेस्ट हार्ट अटैक के बाद होता है या हार्ट अटैक के ठीक होने की प्रक्रिया में हो सकता है। इससे कहा जा सकता है कि हार्ट अटैक के बाद कार्डियक अरेस्ट होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसा जरूरी नहीं है कि हार्ट अटैक की समस्या होने पर कार्डियक अरेस्ट होता ही हो, परंतु कार्डियक अरेस्ट के कई मामलों में हार्ट अटैक का होना एक मुख्य वजह के रूप में देखा जाता है। हृदय से जुड़ी अन्य समस्याएं भी हृदय की धड़कनों को भी बाधित कर सकती है और कार्डियक अरेस्ट की वजह बन सकती है। इन समस्याओं में हृदय की मांसपेशियों का अकड़ना (Cardiomyopathy; कार्डियोम्योपैथी), दिल की विफलता (Heart failure), अनियमित दिल की धड़कन (Arrhythmias), वेंट्रिकुलर फैब्रिलेशन (Ventricular fibrillation) और क्यूटी सिंड्रोम (Q-T syndrome) शामिल हैं।

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हार्ट अटैक होने पर क्या करें?

अगर आपको या आपके आसपास किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक आ जाता है और आप इस स्थिति को समझ नहीं पाते हैं तो इस अवस्था में मरीज को तुरंत अपातकालीन चिकित्सीय उपचार प्रदान कराना चाहिए। हार्ट अटैक आने पर मरीज का हर मिनट कीमती होता है। मरीज को कार या किसी अन्य वाहन से अस्पताल ले जाने से बेहतर होगा कि आप तुरंत किसी अस्पताल कॉल कर एंबुलेंस को बुलाएं। इससे मरीज को अस्पताल पहुंचने तक उचित इलाज मिल पाएगा। वहीं अस्पताल के अपातकालीन विभाग के विशेषज्ञों व अन्य कर्मचारियों को इस तरह से प्रशिक्षित किया जाता है कि वह हार्ट अटैक के द्वारा धड़कने रूक जाने पर भी कई सफल प्रयास कर व्यक्ति की हृदय धड़कनों को दोबारा ला सकते हैं। जबकि एंबुलेंस से अस्पताल पहुँचने तक मरीज के सीने में दर्द का इलाज शुरू कर दिया जाता है।    

अचानक कार्डियक अरेस्ट होने पर क्या करें?

कार्डियक अरेस्ट के कुछ ही मिनटों में इलाज प्रदान करने से इसको ठीक किया जा सकता है। इसके लिए आप सबसे पहले अस्पताल कॉल कर एंबुलेंस व अपातकाल चिकित्सा को बुलाएं। जब तक अपातकालीन इलाज शुरू नहीं होता तब तक आप मरीज को डिफब्रिलेटर (Defibrillator; हृदय पर विद्युतिय झटके देने वाली मशीन) से प्राथमिक इलाज करते रहें। इसके अलावा कार्डियक अरेस्ट मरीज को तुरंत कार्डियोपल्मोनरी रिसासिटेशन (Cardiopulmonary resuscitation; CPR; हृदय धड़कन रूकने पर मरीज को दी जाने वाली चिकित्सीय प्रक्रिया) देनी चाहिए।

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थायराइड डाइट चार्ट

आपकी गर्दन के आगे वाले हिस्से में 'थायरॉयड' एक छोटी सी तितली के आकार की ग्रंथि होती है। इस ग्रंन्थि से थायराइड नामक हार्मोन स्रावित होता है। जब इसकी मात्रा आपके शरीर में कम हो जाती, तो यह हाइपोथायरायडिज्म और जब इसकी मात्रा अधिक हो जाती है, हाइपर्थाइरॉइडिज्म कहलाता है। एक अध्ययन के अनुसार भारत में लगभग 4 करोड़ 20 लाख थाइराइड के मरीज हैं। महिलाएं थाइरोइड की सबसे ज्यादा शिकार होती हैं। हर दस थायराइड मरीज में से आठ महिलाएं होती हैं। थायराइड में तनाव, अवसाद, अनिद्रा, कोलेस्ट्रॉल और दिल की धड़कन का बढ़ना जैसी परेशानियां होती हैं।

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थायराइड में हर व्यक्ति इस समस्या से जूझता है कि कौन सा आहार खाना चाहिए और कौन सा नहीं। इसलिए हम आपके लिए ले कर आए हैं, हाइपोथायरायडिज्म और हाइपर्थाइराइडिज्म के लिए एक हफ्ते का डाइट प्लान, जिसे अपनाकर आप अपने थायराइड को सामान्य स्तर पर ला सकते हैं।

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रात को दही खाना चाहिए या नहीं

दही अच्छे बैक्टीरिया का एक बहुत ही अच्छा स्रोत है जो पाचन में भी सहायक है। यह आपके दांतों और हड्डियों के लिए अच्छी होती है। लेकिन अधिकांश खाद्य पदार्थों के साथ, कुछ नियम हैं जिनका आपको दही लेने के लिए पालन करने की आवश्यकता है। आपने कई बार सुना होगा कि रात को दही खाने से बचें। यहां कुछ नियम बताये गए हैं जिनके बारे में जानना है ज़रूरी -

  1. रात में दही न खाएं, खासकर यदि आपको खाँसी और ठंडे होने का खतरा हो। आयुर्वेद के अनुसार रात में दही का सेवन अच्छा नहीं है क्योंकि इससे बलगम का विकास होता है। लेकिन अगर आप दही के बिना नहीं कर सकते हैं, तो इसके बजाय छाछ को चुनें।
  2. यदि आप दिन के दौरान दही खा रहे हैं, तो इसे बिना चीनी के खाएं। लेकिन अगर आप रात में दही खा रहे हैं, तो चीनी या कुछ काली मिर्च मिलाएं। यह पाचन में सहायता करेगा और आपके पाचन तंत्र को शांत करेगा।
  3. कभी भी गर्म दही नहीं खाएं।

रात में अपने आहार में दही को शामिल करने के लिए जानिए कुछ टिप्स :

1. दही चावल : उबले हुए चावल के साथ कुछ दही मिलाएं। उसमें थोड़ा नमक और काली मिर्च का पाउडर मिलाएँ। आप अच्छा स्वाद लाने के लिए कढ़ी पत्‍ते और कुछ लाल मिर्च के साथ तड़का लगा सकते हैं।

2. दही चीनी : अगर आपको मीठा खाना पसंद है तो आपको यह संयोजन पसंद आएगा। आप दही में कुछ चीनी मिलाकर उसका सेवन करें। रात के खाने के बाद इसका सेवन आपके पेट को शांत करेगा और इससे सभी एसिड को बेअसर हो जायेंगे।

3. छाछ : रात को खाने के बाद छाछ एक और स्वस्थ पेय है। यह न केवल आपके पेट को ठंडक देगा बल्कि कोलन में बैक्टीरिया को बदलता है और जिसके कई अन्य स्वास्थ्य लाभ हैं।

4. लस्सी : लस्सी छाछ का एक मीठा रूप है जो केवल अधिक क्रीमयुक्त और चीनी से परिपूर्ण होती है।

5. कढ़ी : कढ़ी एक पारंपरिक नुस्खा है जिसे बेसन, नमक और छाछ के मिश्रण से तैयार किया जाता है। और इस मिश्रण को कुछ मिर्च, करी पत्तियों और जीरे के साथ तला जाता है। यह करी आम तौर पर चावल या चपाती के साथ खाई जाती है।

6. फ्रूट सलाद : केले, सेब, अनार आदि फलों को काटकर कुछ दही में मिलाएं और एक स्वस्थ मिठाई का आनंद लें। (और पढ़ें - अनार के फायदे)

7. रायता : रायता एक आम भारतीय साइड डिश है। टमाटर, प्याज, खीरा, कद्दू, कटी हुई हरी मिर्च जैसे विभिन्न सब्जियों को मिलाकर इसे तैयार किया जाता है। (और पढ़ें - खाने के बाद दही का सेवन क्यों है फायदेमंद?)



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Monday, February 26, 2018

कलाई में दर्द के घरेलू उपाय

हमारी कलाई आठ छोटी हड्डियों से बनी होती है, जिन्हे कार्पल हड्डी भी कहते हैं। ये हड्डियां बांह की हड्डियों और हाथ की हड्डियों से "लिगमेंट" (ligament) की मदद से जुडी होती हैं। कलाई में दर्द इसके किसी भी हिस्से में चोट या क्षति के कारण होता है। 

हाथ और कलाई में दर्द लगातार हड्डियों में घर्षण व अत्यधिक इस्तेमाल, चोट या बुढ़ापा, कैल्शियम की कमी, गठिया, शुगर, थायराइड बढ़ना (हाइपरथायरायडिज्म) या थायराइड कम होना (हाइपोथायरॉइडिज़्म) और अन्य चिकित्सीय कारण हो सकते हैं।

यहाँ आपको कलाई के दर्द को कम करने के लिए कुछ घरेलू उपाय बताए गए हैं। यह उपाय आपकी मदद ज़रूर करेंगे लेकिन अगर दर्द बहुत तीव्र हो, लगातार या बार बार हो, तो कृप्या डॉक्टर से ज़रूर संपर्क करें।



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बदहजमी (अपच) के घरेलू उपाय

अपच, जिसे चिकित्सा शब्द में डिस्पेपसिया (dyspepsia) भी कहा जाता है, पेट में पाचन जूस के स्राव की समस्या के कारण होता है। आम तौर पर अपच मसालेदार, वसा युक्त या ज़्यादा खा लेने से भी होता है। गैस्ट्रोइफोफेगल रिफ्लक्स रोग (जीईआरडी; GERD), आंत सिंड्रोम, तनाव या चिंता, मोटापा, अल्सर, पेट संक्रमण, थायरॉयड रोग, धूम्रपान और कुछ दवाओं के कारण यह और भी बदतर हो सकता है।

(और पढ़ें - महिलाओं में थायराइड लक्षण)

अपच के कुछ लक्षण जैसे सूजन, गैस, पेट दर्द, ऊपरी पेट में जलन, अम्लीय स्वाद और उल्टी आदि शामिल हैं। आप अपने किचन में उपलब्ध सामग्रियों से भी अपच के लक्षणों से राहत प्राप्त कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, जैसे ही आपको अपच की समस्या शुरू होती है तो थोड़ा पानी पी लें इससे आपको गैस्ट्रिक pH को बढ़ाने में मदद मिलेगी। (और पढ़ें - पेट फूलने की समस्या से अगर छुटकारा चाहते हैं तो जरूर करें ये उपाय)

ऐसे कई और अन्य उपाय हैं जिनका इस्तेमाल आप अपच की समस्या के लिए कर सकते हैं। इसके अलावा गंभीर समस्या होने पर एक बार अपने डॉक्टर से भी जानकारी लें।



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थायराइड कम करने के घरेलू उपाय

थायराइड एक तितली के आकार की ग्रंथि होती है जो एडम एप्पल के ठीक नीचे गर्दन में स्थित होती है। इसे मुख्य ग्रंथि के रूप में जाना जाता है जो शरीर की ऊर्जा और चयापचय को नियंत्रित करने में मदद करती है। जब थायरॉयड अत्यधिक सक्रिय हो जाती है और थायरोक्सिन हार्मोन की अत्यधिक मात्रा में उत्पादन करने लगती है तो इस स्थिति को हाइपरथायरायडिज्म कहा जाता है। (और दूसरी तरफ, थायरोक्सिन हार्मोन के कम मात्रा में उत्पादन को हाइपोथायरायडिज्म कहा जाता है)

(और पढ़ें - थायराइड के लक्षण)

हाइपरथायरायडिज्म के सामान्य कारणों में शामिल हैं ऑटोइम्यून डिसॉर्डर जिसे ग्रेव्स रोग कहा जाता है साथ ही थायरॉयड ग्रंथि की सूजन, थायरॉयड हार्मोन का असामन्य स्राव, आयोडीन का अत्यधिक सेवन या थायरॉयड में सौम्य गांठ या नोड्यूल आदि शामिल हैं। हाइपरथायरॉडीजम किसी को भी हो सकता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ये स्तिथि आठ गुना अधिक होती है। यह 30 की उम्र की शुरुआत में ही विकसित होने लगती है लेकिन इसके लक्षण 60 से अधिक महिलाओं में ज़्यादा सामान्य हैं।

कई तरह के संकेत हाइपरथायरोडिज़्म के लक्षणों को बताते हैं जैसे वज़न का घटना, अनियमित दिल की धड़कन, घबराहट, अत्यधिक पसीना, मासिक धर्म चक्र में बदलाव, गर्दन के आधार पर सूजन, थकान, मांसपेशियों की कमजोरी और सोने में कठिनाई महसूस होना आदि शामिल हैं। हाइपरथायरायडिज्म के कई लक्षण अन्य स्थितियों के लिए भी बहुत आम है। इसलिए समस्या को जल्द पहचानना थोड़ा मुश्किल होता है। (और पढ़ें – थकान कम करने के घरेलू उपाय)

थायरॉयड का जल्द निदान दवाओं, सप्लीमेंट्स और जीवनशैली में बदलाव लाकर किया जा सकता है। हाइपरथायरायडिज्म का इलाज कुछ प्राकर्तिक तत्वों से भी किया जा सकता है। हालाँकि कोई भी उपचार लेने से पहले आप अपने डॉक्टर से सभी तरह की जानकारी ले लें। (और पढ़ें - थायराइड में क्या खाना चाहिए)

तो आईये आज आपको बताते हैं कुछ थायराइड कम करने के घरेलू उपाय।



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चिंता दूर करने के घरेलू उपाय

आज के व्यस्त और प्रतिस्पर्धी जीवन में हम चिंता और तनाव को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। इसके साथ ही कुछ लोगों को स्वाभाविक रूप से दूसरों की तुलना में घबराहट और चिंता की संभावना अधिक महसूस होती है। अन्य कारण जो इस समस्या को बढ़ाते हैं जैसे अवसाद, अच्छे से नींद न ले पाना, पोषण संबंधी कमी, निकोटीन, अधिवृक्क संबंधी विकार (adrenal disorders), थाइरोइड विकार और कुछ दवाएं आदि इसमें शामिल हैं। चिंता के कुछ सामान्य लक्षण जैसे डर, आशंका, बेचैनी, सिरदर्द, हृदय की धड़कने तेज़ होना, सांस की तकलीफ, सोने में दिक्कत, पेट में परेशानी, शुष्क मुँह, मतली, चक्कर आना और थकान आदि शामिल हैं। (और पढ़ें – थकान दूर करने के घरेलू उपाय)

जिन लोगो को बहुत गंभीर या पुरानी चिंता और तनाव की समस्या है उन्हें इससे जुडी बहुत बड़ी परेशानी झेलनी पड़ सकती है। चिंता और तनाव दो बहुत आम स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं। तो ज़रूरी है आप इन गंभीर स्थितियों को संभाल लें। बहुत से लोग प्राकृतिक उपाय को बेहद प्रभावी मानते हैं। (और पढ़ें - चिंता के लक्षण, कारण, उपचार, दवा और निदान)

तो आइये आज हम आपको बताते हैं चिंता को दूर करने के लिए कुछ घरेलू उपाए जिनके इस्तेमाल से आपको चिंता और तनाव की समस्या दूर करने में मदद मिलेगी।  



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